Read डायन by वेद प्रकाश शर्मा Online

डायन

डायन ...एक औरत के पति की मृतयु हो गई। उसकी बुदधि भरषट हुई तो पति को जिंदा करने के लिए दूसरों के बचचांे की बलि देने लगी। पर उसे मालूम नहीं था कि किसी की आंखें सपनों में उसकी करतूतें देख रही हैं। फिर सपने देखने वाले और उस औरत के बीच जंग शुरु हुई, मगर वे तो सिरफ बहाना थे, असली जंग तो माता दुरगा और डायन के बीच थी और जब मां जगदमबा अपने रौदर रूप में आईं तो काली शकतियों के चेहरेडायन ...एक औरत के पति की मृत्यु हो गई। उसकी बुद्धि भ्रष्ट हुई तो पति को जिंदा करने के लिए दूसरों के बच्चांे की बलि देने लगी। पर उसे मालूम नहीं था कि किसी की आंखें सपनों में उसकी करतूतें देख रही हैं। फिर सपने देखने वाले और उस औरत के बीच जंग शुरु हुई, मगर वे तो सिर्फ बहाना थे, असली जंग तो माता दुर्गा और डायन के बीच थी और जब मां जगदम्बा अपने रौद्र रूप में आईं तो काली शक्तियों के चेहरे सफेद पड़ गए।...

Title : डायन
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ISBN : 33380048
Format Type : Paperback
Number of Pages : 272 Pages
Status : Available For Download
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डायन Reviews

  • विकास नैनवाल
    2019-05-24 20:47

    2.5/5उपन्यास रोचक किन्तु अधूरा है। अगर आप इस उपन्यास को पढना चाहते हैं तो इसका दूसरा भाग भी साथ में रखियेगा वरना मज़ा किरकिरा हो जायेगा।उपन्यास के विषय में मेरी विस्तृत राय इधर मिल सकती है: डायन